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जमुई दारोगा प्रभात रंजन हत्याकांड में बड़ा फैसला, तीन दोषियों को उम्रकैद, बालू माफियाओं पर सख्त संदेश

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जमुई के चर्चित दारोगा प्रभात रंजन हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन मुख्य दोषियों को उम्रकैद की सजा दी है। अवैध बालू खनन रोकने के दौरान ट्रैक्टर से कुचलकर दारोगा की हत्या कर दी गई थी।

जमुई/आलम की खबर: बिहार के जमुई जिले में करीब ढाई साल पहले हुए चर्चित दारोगा प्रभात रंजन हत्याकांड में अदालत ने बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) सुधीर सिन्हा की अदालत ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद तीन मुख्य आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले को न्याय की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे पुलिस विभाग और मृतक अधिकारी के परिवार को राहत मिली है।

यह मामला 23 नवंबर 2023 की उस दर्दनाक घटना से जुड़ा है, जिसने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया था। जमुई जिले के गढ़ी थाना क्षेत्र में तैनात सब-इंस्पेक्टर प्रभात रंजन अवैध बालू खनन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में शामिल थे। उस दिन पुलिस को सूचना मिली थी कि इलाके में बड़े पैमाने पर अवैध बालू की ढुलाई की जा रही है। सूचना के आधार पर प्रभात रंजन अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे।

जांच के दौरान पुलिस ने एक बालू से लदे ट्रैक्टर को रोकने की कोशिश की, लेकिन आरोपियों ने कानून का पालन करने के बजाय हिंसक रास्ता चुना। आरोप है कि ट्रैक्टर चालक ने जानबूझकर वाहन को दारोगा की ओर मोड़ दिया और उन्हें कुचलते हुए फरार होने की कोशिश की। इस हमले में प्रभात रंजन गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे राज्य में अवैध खनन और बालू माफिया की सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

घटना के बाद राज्यभर में आक्रोश फैल गया था। पुलिस विभाग में शोक की लहर दौड़ गई थी और बालू माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई थी। सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच के निर्देश दिए थे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया और अदालत में मजबूत साक्ष्य पेश किए।

लंबी सुनवाई और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने कृष्ण दास, मिथिलेश ठाकुर और पवन दास को इस हत्याकांड का मुख्य दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने तीनों पर 20-20 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले पुलिस अधिकारी पर हमला करना बेहद गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में कठोर सजा आवश्यक है ताकि समाज में गलत संदेश न जाए।

इस मामले में अन्य सह-आरोपियों दशरथ दास, चिंता देवी और भूलिया देवी को भी अदालत ने दोषी माना। इन्हें दो-दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है। अदालत ने माना कि इन लोगों ने अपराधियों को सहायता प्रदान की और घटना के बाद उन्हें संरक्षण देने की कोशिश की थी।

शहीद दारोगा प्रभात रंजन मूल रूप से वैशाली जिले के भगवानपुर थाना क्षेत्र के खजूरी गांव के रहने वाले थे। वे अपने कर्तव्यनिष्ठ और साहसी स्वभाव के लिए जाने जाते थे। अवैध बालू खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान उन्होंने अपनी जान गंवा दी थी। अदालत के फैसले के बाद उनके पैतृक गांव में लोगों ने राहत की सांस ली और परिजनों ने कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा था।

इस फैसले के बाद पुलिस विभाग में भी संतोष का माहौल है। अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय अपराधियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि कानून के रखवालों पर हमला करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। इस फैसले को बिहार में अवैध बालू खनन और उससे जुड़े अपराधों के खिलाफ एक मजबूत कानूनी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

फिलहाल यह फैसला राज्य में कानून व्यवस्था और पुलिस सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि न्याय प्रक्रिया लंबी जरूर होती है, लेकिन अंत में अपराधियों को सजा जरूर मिलती है।

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